Friday, September 3, 2010

वासना का भावना में रूपांतरण... - I

'काम' इन्सान को शैतान भी बनाता है और देवता के रूप में भी गढ़ सकता है . भावना जब अधःपतित होती है तो वह कामवासना बन जाती है . उच्छ्रिन्खल कामवासना ही इन्सान को शैतान बनाती है और वह पशुतुल्य बन जाता है तथा मर्यादा की सारी सीमाएं लाँघ जाता है, जबकि भावना की परिष्कृति प्रार्थना के रूप में परिवर्तित होती है, भक्ति एवं प्रेम के रूप में सुवासित होती है और इन्सान को दिव्यत्व एवं देवत्व प्रदान करती है. कमवासना को नष्ट नहीं किया जा सकता है. जब तक देह है, इसका अस्तित्व बना ही रहता है, परन्तु इसका नियंत्रण एवं रूपांतरण संभव है .
सदियों से कामवासना को हेय एवं तिरस्कृत मानकर इसकी भर्त्सना की जाती रही है, परन्तु कोई भी इससे पार नहीं पा सका है ; बातें कितनी भी क्यों न हों . यह ऐसा रहस्य है, जिससे विरले ही पार पाने का प्रयास कर सके हैं और वह भी पूर्ण रूप से नहीं; अर्थात अभी भी यह यथावत बना हुआ है अपनी समस्याओं के साथ . काम नष्ट नहीं होता है, इसका विनाश संभव नहीं है, अतः इसकी समस्या बनी रहती है .दुर्गासप्तशती में कथानक के रूप में इसका उल्लेख मिलता है . माँ दुर्गा सभी दैत्यों को मार गिरती है , परन्तु महिषासुर ही एक ऐसा दैत्य है, जो मरता नहीं है, माता के चरणों में शरणागति को प्राप्त होता है . अतः काम का प्रतीक महिषासुर मारा नहीं, बल्कि भक्ति एवं प्रेम बनकर माँ का आश्रय एवं शरण पा गया .
वासना का समाधान केवल उसके रूपांतरण में ही निहित है, अन्यथा वासना जीवन के लिए गंभीर समस्या बन जाती है . इस समस्या का उचित समाधान न हो पाने के कारन ही इसकी भर्त्सना की गई है और रोचक बात तो यह है कि भर्त्सना करने वाले भी इससे निर्लिप्त नहीं हो सके हैं; क्योंकि इसके पार जा पाना आग के दरिया को पार करने जैसा है . कामवासना हमारी देह में रच-बस गई है . हमारी देह के प्रत्येक कोशिका में इसका अस्तित्व समां गया है . अतः यदि कोई कहता है कि मैंने काम पर विजय प्राप्त कर ली है तो संभवतः वह उससे परिचित नहीं है . जब तक देह कि प्रत्येक कोशिका का रूपांतरण न हो जाये, काम से विजय संभव ही नहीं और देह का रूपांतरण अभी तक की सभी साधनावों से गूढतम एवं विरल शाधना है . श्री अरविन्द ने रूपांतरण की शाधना पर सर्वप्रथम कार्य किया था और वे बहुत हद तक इसमें सफल भी हुए थे, परन्तु उन्होंने भी इसकी सम्पूर्ण सफलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था .

3 comments:

  1. wow!!!
    bahut bahut dhanyawad...

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  2. अभय,
    आज अपने ब्लॉग के फ़ॉलोअर्स को चैक कर रहा था, वहीं से तुम्हारे ब्लॉग पर पहुंचा हूँ। प्रस्तुत पोस्ट बहुत अच्छी लिखी है, और विस्तार मांगती है। ऐसा लगता है, लवली से इंजी. कर रहे हो। पढ़ाई से फ़ुर्सत मिले तो इस विषय पर और लिखना, अच्छा लगेगा।

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  3. बहुत बहुत धन्यवाद

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