Friday, January 7, 2011
वासना का भावना में रूपांतरण...-II
ऐसे में काम की समस्या का समाधान क्या हो ? इसका समाधान आज से पाँच हजार वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने खोजा था . उन्होंने स्पष्ट किया था की धर्म के अनुकूल आचरण करके कामवासना पर नियंत्रण किया जा सकता है . धर्म के विरुद्ध आचरण करने पर ही काम एक गंभीर समस्या बनता है . अतः मर्यादा,निति,संयम एवं प्रकृति को ध्यान में रखकर ही कामवासना में प्रवृत्त होना चाहिए I वे कहते हैं (भगवान श्री कृष्ण)- 'प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः'( गीता १०/२८ ) अर्थात शास्त्रोक्त रीति से संतान की उत्पत्ति हेतु मैं कामदेव हूँ . काम का प्रयोग न हो तो सृष्टि की प्रक्रिया ही अवरुद्ध हो जाएगी . अतः महायोगी श्री कृष्ण कहते हैं की इसका प्रयोग उच्छ्रिन्खल भोग के लिए नहीं है , बल्कि संयम एवं धर्माचरण के द्वारा संतान की उत्पत्ति में निहित है .
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